पंचांग 1 जनवरी 2014

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

1 जनवरी 2014 · बुधवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय07:06
सूर्यास्त18:09
चंद्रोदयनहीं
चंद्रास्त18:14
मास:
मार्गशीर्ष (अमांत) · पौष (पूर्णिमांत)
संवत:
शक 1936 · विक्रम (चैत्रादि) 2071
संवत्सर:
जय (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
हेमंत · दक्षिणायन
सूर्य राशि:
धनु
चंद्र राशि:
धनु

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
बुधवार
तिथि
कृष्ण अमावस्या 16:44 तक, फिर शुक्ल प्रतिपदा 12:51 (2 जन॰) तक
नक्षत्र
मूल 11:08 तक, फिर पूर्वाषाढ़ा 08:01 (2 जन॰) तक
योग
ध्रुव 01:49 (2 जन॰) तक, फिर व्याघात 21:24 (2 जन॰) तक
करण
नाग 16:44 तक, फिर किंस्तुघ्न 02:47 (2 जन॰) तक, फिर बव 12:51 (2 जन॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:15 – 13:00परंपरा में बुधवार को अभिजित नहीं लिया जाता
  • राहु काल12:38 – 14:00
  • यमगंड08:29 – 09:52
  • गुलिक काल11:15 – 12:38

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • लाभ(शुभ)07:06 – 08:29
  • अमृत(शुभ)08:29 – 09:52
  • काल(वर्जित (परंपरा))09:52 – 11:15
  • शुभ(शुभ)11:15 – 12:38
  • रोग(वर्जित (परंपरा))12:38 – 14:00
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))14:00 – 15:23
  • चर(सामान्य)15:23 – 16:46
  • लाभ(शुभ)16:46 – 18:09

रात

  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))18:09 – 19:46
  • शुभ(शुभ)19:46 – 21:23
  • अमृत(शुभ)21:23 – 23:00
  • चर(सामान्य)23:00 – 00:38 (2 जन॰)
  • रोग(वर्जित (परंपरा))00:38 (2 जन॰) – 02:15 (2 जन॰)
  • काल(वर्जित (परंपरा))02:15 (2 जन॰) – 03:52 (2 जन॰)
  • लाभ(शुभ)03:52 (2 जन॰) – 05:29 (2 जन॰)
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))05:29 (2 जन॰) – 07:07 (2 जन॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 123

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