पंचांग 19 मई 2025

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

19 मई 2025 · सोमवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय05:59
सूर्यास्त19:02
चंद्रोदय00:43 (20 मई)
चंद्रास्त11:23
मास:
वैशाख (अमांत) · ज्येष्ठ (पूर्णिमांत)
संवत:
शक 1947 · विक्रम (चैत्रादि) 2082
संवत्सर:
विश्वावसु (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
वसंत · उत्तरायण
सूर्य राशि:
वृषभ
चंद्र राशि:
मकर

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
सोमवार
तिथि
कृष्ण षष्ठी 06:12 तक, फिर कृष्ण सप्तमी 05:52 (20 मई) तक, फिर कृष्ण अष्टमी 04:55 (21 मई) तक
नक्षत्र
श्रवण 19:30 तक, फिर धनिष्ठा 19:32 (20 मई) तक
योग
ब्रह्म 04:35 (20 मई) तक, फिर इन्द्र 02:50 (21 मई) तक
करण
वणिज 06:12 तक, फिर विष्टि 18:06 तक, फिर बव 05:52 (20 मई) तक, फिर बालव 17:28 (20 मई) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:05 – 12:57
  • राहु काल07:37 – 09:15
  • यमगंड10:53 – 12:31
  • गुलिक काल14:08 – 15:46

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • अमृत(शुभ)05:59 – 07:37
  • काल(वर्जित (परंपरा))07:37 – 09:15
  • शुभ(शुभ)09:15 – 10:53
  • रोग(वर्जित (परंपरा))10:53 – 12:31
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))12:31 – 14:08
  • चर(सामान्य)14:08 – 15:46
  • लाभ(शुभ)15:46 – 17:24
  • अमृत(शुभ)17:24 – 19:02

रात

  • चर(सामान्य)19:02 – 20:24
  • रोग(वर्जित (परंपरा))20:24 – 21:46
  • काल(वर्जित (परंपरा))21:46 – 23:08
  • लाभ(शुभ)23:08 – 00:30 (20 मई)
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))00:30 (20 मई) – 01:53 (20 मई)
  • शुभ(शुभ)01:53 (20 मई) – 03:15 (20 मई)
  • अमृत(शुभ)03:15 (20 मई) – 04:37 (20 मई)
  • चर(सामान्य)04:37 (20 मई) – 05:59 (20 मई)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61

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