पंचांग 14 मार्च 2026
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
14 मार्च 2026 · शनिवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय06:43
सूर्यास्त18:43
चंद्रोदय04:04 (15 मार्च)
चंद्रास्त14:29
- मास:
- फाल्गुन (अमांत) · चैत्र (पूर्णिमांत)
- संवत:
- शक 1947 · विक्रम (चैत्रादि) 2082
- संवत्सर:
- विश्वावसु (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- शिशिर · उत्तरायण
- सूर्य राशि:
- कुंभ
- चंद्र राशि:
- धनु 09:33 तक, फिर मकर
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- शनिवार
- तिथि
- कृष्ण दशमी 08:11 तक, फिर कृष्ण एकादशी 09:17 (15 मार्च) तक
- नक्षत्र
- उत्तराषाढ़ा 04:49 (15 मार्च) तक, फिर श्रवण 05:56 (16 मार्च) तक
- योग
- वरीयान 10:42 तक, फिर परिघ 10:25 (15 मार्च) तक
- करण
- विष्टि 08:11 तक, फिर बव 20:49 तक, फिर बालव 09:17 (15 मार्च) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त12:19 – 13:07
- राहु काल09:43 – 11:13
- यमगंड14:13 – 15:43
- गुलिक काल06:43 – 08:13
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- काल(वर्जित (परंपरा))06:43 – 08:13
- शुभ(शुभ)08:13 – 09:43
- रोग(वर्जित (परंपरा))09:43 – 11:13
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))11:13 – 12:43
- चर(सामान्य)12:43 – 14:13
- लाभ(शुभ)14:13 – 15:43
- अमृत(शुभ)15:43 – 17:13
- काल(वर्जित (परंपरा))17:13 – 18:43
रात
- लाभ(शुभ)18:43 – 20:13
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))20:13 – 21:43
- शुभ(शुभ)21:43 – 23:13
- अमृत(शुभ)23:13 – 00:43 (15 मार्च)
- चर(सामान्य)00:43 (15 मार्च) – 02:13 (15 मार्च)
- रोग(वर्जित (परंपरा))02:13 (15 मार्च) – 03:43 (15 मार्च)
- काल(वर्जित (परंपरा))03:43 (15 मार्च) – 05:13 (15 मार्च)
- लाभ(शुभ)05:13 (15 मार्च) – 06:42 (15 मार्च)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61
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