पंचांग 15 मार्च 2026

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

15 मार्च 2026 · रविवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:42
सूर्यास्त18:44
चंद्रोदय04:45 (16 मार्च)
चंद्रास्त15:25
मास:
फाल्गुन (अमांत) · चैत्र (पूर्णिमांत)
संवत:
शक 1947 · विक्रम (चैत्रादि) 2082
संवत्सर:
विश्वावसु (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
शिशिर · उत्तरायण
सूर्य राशि:
मीन
चंद्र राशि:
मकर

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
रविवार
तिथि
कृष्ण एकादशी 09:16 तक, फिर कृष्ण द्वादशी 09:41 (16 मार्च) तक
नक्षत्र
श्रवण 05:56 (16 मार्च) तक, फिर धनिष्ठा 06:22 (17 मार्च) तक
योग
परिघ 10:25 तक, फिर शिव 09:36 (16 मार्च) तक
करण
बालव 09:16 तक, फिर कौलव 21:34 तक, फिर तैतिल 09:41 (16 मार्च) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:19 – 13:07
  • राहु काल17:14 – 18:44
  • यमगंड12:43 – 14:13
  • गुलिक काल15:43 – 17:14

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))06:42 – 08:13
  • चर(सामान्य)08:13 – 09:43
  • लाभ(शुभ)09:43 – 11:13
  • अमृत(शुभ)11:13 – 12:43
  • काल(वर्जित (परंपरा))12:43 – 14:13
  • शुभ(शुभ)14:13 – 15:43
  • रोग(वर्जित (परंपरा))15:43 – 17:14
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))17:14 – 18:44

रात

  • शुभ(शुभ)18:44 – 20:13
  • अमृत(शुभ)20:13 – 21:43
  • चर(सामान्य)21:43 – 23:13
  • रोग(वर्जित (परंपरा))23:13 – 00:43 (16 मार्च)
  • काल(वर्जित (परंपरा))00:43 (16 मार्च) – 02:12 (16 मार्च)
  • लाभ(शुभ)02:12 (16 मार्च) – 03:42 (16 मार्च)
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))03:42 (16 मार्च) – 05:12 (16 मार्च)
  • शुभ(शुभ)05:12 (16 मार्च) – 06:42 (16 मार्च)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61

अपनी कुंडली देखें