पंचांग 27 अप्रैल 2026

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

27 अप्रैल 2026 · सोमवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:09
सूर्यास्त18:54
चंद्रोदय15:21
चंद्रास्त03:48 (28 अप्रैल)
मास:
वैशाख (अमांत)
संवत:
शक 1948 · विक्रम (चैत्रादि) 2083
संवत्सर:
पराभव (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
वसंत · उत्तरायण
सूर्य राशि:
मेष
चंद्र राशि:
सिंह 03:35 (28 अप्रैल) तक, फिर कन्या

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
सोमवार
तिथि
शुक्ल एकादशी 18:16 तक, फिर शुक्ल द्वादशी 18:52 (28 अप्रैल) तक
नक्षत्र
पूर्वाफाल्गुनी 21:18 तक, फिर उत्तराफाल्गुनी 22:36 (28 अप्रैल) तक
योग
ध्रुव 21:35 तक, फिर व्याघात 21:04 (28 अप्रैल) तक
करण
विष्टि 18:16 तक, फिर बव 06:31 (28 अप्रैल) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:06 – 12:57
  • राहु काल07:45 – 09:21
  • यमगंड10:56 – 12:32
  • गुलिक काल14:07 – 15:43

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • अमृत(शुभ)06:09 – 07:45
  • काल(वर्जित (परंपरा))07:45 – 09:21
  • शुभ(शुभ)09:21 – 10:56
  • रोग(वर्जित (परंपरा))10:56 – 12:32
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))12:32 – 14:07
  • चर(सामान्य)14:07 – 15:43
  • लाभ(शुभ)15:43 – 17:19
  • अमृत(शुभ)17:19 – 18:54

रात

  • चर(सामान्य)18:54 – 20:19
  • रोग(वर्जित (परंपरा))20:19 – 21:43
  • काल(वर्जित (परंपरा))21:43 – 23:07
  • लाभ(शुभ)23:07 – 00:32 (28 अप्रैल)
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))00:32 (28 अप्रैल) – 01:56 (28 अप्रैल)
  • शुभ(शुभ)01:56 (28 अप्रैल) – 03:20 (28 अप्रैल)
  • अमृत(शुभ)03:20 (28 अप्रैल) – 04:44 (28 अप्रैल)
  • चर(सामान्य)04:44 (28 अप्रैल) – 06:09 (28 अप्रैल)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61

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