पंचांग 28 अप्रैल 2026

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

28 अप्रैल 2026 · मंगलवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:09
सूर्यास्त18:55
चंद्रोदय16:12
चंद्रास्त04:21 (29 अप्रैल)
मास:
वैशाख (अमांत)
संवत:
शक 1948 · विक्रम (चैत्रादि) 2083
संवत्सर:
पराभव (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
वसंत · उत्तरायण
सूर्य राशि:
मेष
चंद्र राशि:
कन्या

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
मंगलवार
तिथि
शुक्ल द्वादशी 18:52 तक, फिर शुक्ल त्रयोदशी 19:52 (29 अप्रैल) तक
नक्षत्र
उत्तराफाल्गुनी 22:36 तक, फिर हस्त 00:16 (30 अप्रैल) तक
योग
व्याघात 21:04 तक, फिर हर्षण 20:51 (29 अप्रैल) तक
करण
बव 06:31 तक, फिर बालव 18:52 तक, फिर कौलव 07:19 (29 अप्रैल) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:06 – 12:57
  • राहु काल15:43 – 17:19
  • यमगंड09:20 – 10:56
  • गुलिक काल12:32 – 14:07

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • रोग(वर्जित (परंपरा))06:09 – 07:44
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))07:44 – 09:20
  • चर(सामान्य)09:20 – 10:56
  • लाभ(शुभ)10:56 – 12:32
  • अमृत(शुभ)12:32 – 14:07
  • काल(वर्जित (परंपरा))14:07 – 15:43
  • शुभ(शुभ)15:43 – 17:19
  • रोग(वर्जित (परंपरा))17:19 – 18:55

रात

  • काल(वर्जित (परंपरा))18:55 – 20:19
  • लाभ(शुभ)20:19 – 21:43
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))21:43 – 23:07
  • शुभ(शुभ)23:07 – 00:31 (29 अप्रैल)
  • अमृत(शुभ)00:31 (29 अप्रैल) – 01:56 (29 अप्रैल)
  • चर(सामान्य)01:56 (29 अप्रैल) – 03:20 (29 अप्रैल)
  • रोग(वर्जित (परंपरा))03:20 (29 अप्रैल) – 04:44 (29 अप्रैल)
  • काल(वर्जित (परंपरा))04:44 (29 अप्रैल) – 06:08 (29 अप्रैल)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61

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