पंचांग 6 जनवरी 2027

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

6 जनवरी 2027 · बुधवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय07:08
सूर्यास्त18:12
चंद्रोदय06:43 (7 जन॰)
चंद्रास्त16:55
मास:
मार्गशीर्ष (अमांत) · पौष (पूर्णिमांत)
संवत:
शक 1949 · विक्रम (चैत्रादि) 2084
संवत्सर:
प्लवंग (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
हेमंत · दक्षिणायन
सूर्य राशि:
धनु
चंद्र राशि:
धनु

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
बुधवार
तिथि
कृष्ण चतुर्दशी 23:14 तक, फिर कृष्ण अमावस्या 01:54 (8 जन॰) तक
नक्षत्र
मूल 06:08 (7 जन॰) तक, फिर पूर्वाषाढ़ा 09:13 (8 जन॰) तक
योग
वृद्धि 13:32 तक, फिर ध्रुव 14:26 (7 जन॰) तक
करण
विष्टि 09:56 तक, फिर शकुनि 23:14 तक, फिर चतुष्पद 12:34 (7 जन॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:18 – 13:02परंपरा में बुधवार को अभिजित नहीं लिया जाता
  • राहु काल12:40 – 14:03
  • यमगंड08:31 – 09:54
  • गुलिक काल11:17 – 12:40

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • लाभ(शुभ)07:08 – 08:31
  • अमृत(शुभ)08:31 – 09:54
  • काल(वर्जित (परंपरा))09:54 – 11:17
  • शुभ(शुभ)11:17 – 12:40
  • रोग(वर्जित (परंपरा))12:40 – 14:03
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))14:03 – 15:26
  • चर(सामान्य)15:26 – 16:49
  • लाभ(शुभ)16:49 – 18:12

रात

  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))18:12 – 19:49
  • शुभ(शुभ)19:49 – 21:26
  • अमृत(शुभ)21:26 – 23:03
  • चर(सामान्य)23:03 – 00:40 (7 जन॰)
  • रोग(वर्जित (परंपरा))00:40 (7 जन॰) – 02:17 (7 जन॰)
  • काल(वर्जित (परंपरा))02:17 (7 जन॰) – 03:54 (7 जन॰)
  • लाभ(शुभ)03:54 (7 जन॰) – 05:31 (7 जन॰)
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))05:31 (7 जन॰) – 07:08 (7 जन॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61

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