पंचांग 26 मई 2027

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

26 मई 2027 · बुधवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय05:58
सूर्यास्त19:05
चंद्रोदय23:51
चंद्रास्त10:40
मास:
वैशाख (अमांत) · ज्येष्ठ (पूर्णिमांत)
संवत:
शक 1949 · विक्रम (चैत्रादि) 2084
संवत्सर:
प्लवंग (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
वसंत · उत्तरायण
सूर्य राशि:
वृषभ
चंद्र राशि:
मकर

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
बुधवार
तिथि
कृष्ण षष्ठी 04:05 (27 मई) तक, फिर कृष्ण सप्तमी 06:26 (28 मई) तक
नक्षत्र
श्रवण 04:19 (27 मई) तक, फिर धनिष्ठा 07:14 (28 मई) तक
योग
ब्रह्म 02:01 (27 मई) तक, फिर इन्द्र 02:58 (28 मई) तक
करण
गर 14:48 तक, फिर वणिज 04:05 (27 मई) तक, फिर विष्टि 17:18 (27 मई) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:05 – 12:57परंपरा में बुधवार को अभिजित नहीं लिया जाता
  • राहु काल12:31 – 14:10
  • यमगंड07:36 – 09:14
  • गुलिक काल10:53 – 12:31

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • लाभ(शुभ)05:58 – 07:36
  • अमृत(शुभ)07:36 – 09:14
  • काल(वर्जित (परंपरा))09:14 – 10:53
  • शुभ(शुभ)10:53 – 12:31
  • रोग(वर्जित (परंपरा))12:31 – 14:10
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))14:10 – 15:48
  • चर(सामान्य)15:48 – 17:26
  • लाभ(शुभ)17:26 – 19:05

रात

  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))19:05 – 20:26
  • शुभ(शुभ)20:26 – 21:48
  • अमृत(शुभ)21:48 – 23:09
  • चर(सामान्य)23:09 – 00:31 (27 मई)
  • रोग(वर्जित (परंपरा))00:31 (27 मई) – 01:53 (27 मई)
  • काल(वर्जित (परंपरा))01:53 (27 मई) – 03:14 (27 मई)
  • लाभ(शुभ)03:14 (27 मई) – 04:36 (27 मई)
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))04:36 (27 मई) – 05:57 (27 मई)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61

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