पंचांग 20 सितंबर 2027
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
20 सितंबर 2027 · सोमवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय06:23
सूर्यास्त18:32
चंद्रोदय21:20
चंद्रास्त09:58
- मास:
- भाद्रपद (अमांत) · आश्विन (पूर्णिमांत)
- संवत:
- शक 1949 · विक्रम (चैत्रादि) 2084
- संवत्सर:
- प्लवंग (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- वर्षा · दक्षिणायन
- सूर्य राशि:
- कन्या
- चंद्र राशि:
- मेष 00:12 (21 सित॰) तक, फिर वृषभ
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- सोमवार
- तिथि
- कृष्ण चतुर्थी 07:08 तक, फिर कृष्ण पंचमी 06:43 (21 सित॰) तक
- नक्षत्र
- भरणी 18:09 तक, फिर कृत्तिका 18:12 (21 सित॰) तक
- योग
- व्याघात 07:14 तक, फिर हर्षण 05:49 (21 सित॰) तक, फिर वज्र 04:04 (22 सित॰) तक
- करण
- बालव 07:08 तक, फिर कौलव 18:59 तक, फिर तैतिल 06:43 (21 सित॰) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त12:03 – 12:52
- राहु काल07:54 – 09:25
- यमगंड10:56 – 12:28
- गुलिक काल13:59 – 15:30
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- अमृत(शुभ)06:23 – 07:54
- काल(वर्जित (परंपरा))07:54 – 09:25
- शुभ(शुभ)09:25 – 10:56
- रोग(वर्जित (परंपरा))10:56 – 12:28
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))12:28 – 13:59
- चर(सामान्य)13:59 – 15:30
- लाभ(शुभ)15:30 – 17:01
- अमृत(शुभ)17:01 – 18:32
रात
- चर(सामान्य)18:32 – 20:01
- रोग(वर्जित (परंपरा))20:01 – 21:30
- काल(वर्जित (परंपरा))21:30 – 22:59
- लाभ(शुभ)22:59 – 00:28 (21 सित॰)
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))00:28 (21 सित॰) – 01:56 (21 सित॰)
- शुभ(शुभ)01:56 (21 सित॰) – 03:25 (21 सित॰)
- अमृत(शुभ)03:25 (21 सित॰) – 04:54 (21 सित॰)
- चर(सामान्य)04:54 (21 सित॰) – 06:23 (21 सित॰)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61
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