पंचांग 21 सितंबर 2027

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

21 सितंबर 2027 · मंगलवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:23
सूर्यास्त18:32
चंद्रोदय22:11
चंद्रास्त10:57
मास:
भाद्रपद (अमांत) · आश्विन (पूर्णिमांत)
संवत:
शक 1949 · विक्रम (चैत्रादि) 2084
संवत्सर:
प्लवंग (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
वर्षा · दक्षिणायन
सूर्य राशि:
कन्या
चंद्र राशि:
वृषभ

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
मंगलवार
तिथि
कृष्ण पंचमी 06:43 तक, फिर कृष्ण षष्ठी 05:52 (22 सित॰) तक, फिर कृष्ण सप्तमी 04:37 (23 सित॰) तक
नक्षत्र
कृत्तिका 18:13 तक, फिर रोहिणी 17:52 (22 सित॰) तक
योग
वज्र 04:04 (22 सित॰) तक, फिर सिद्धि 02:00 (23 सित॰) तक
करण
तैतिल 06:43 तक, फिर गर 18:21 तक, फिर वणिज 05:52 (22 सित॰) तक, फिर विष्टि 17:18 (22 सित॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:03 – 12:51
  • राहु काल15:29 – 17:00
  • यमगंड09:25 – 10:56
  • गुलिक काल12:27 – 13:58

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • रोग(वर्जित (परंपरा))06:23 – 07:54
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))07:54 – 09:25
  • चर(सामान्य)09:25 – 10:56
  • लाभ(शुभ)10:56 – 12:27
  • अमृत(शुभ)12:27 – 13:58
  • काल(वर्जित (परंपरा))13:58 – 15:29
  • शुभ(शुभ)15:29 – 17:00
  • रोग(वर्जित (परंपरा))17:00 – 18:32

रात

  • काल(वर्जित (परंपरा))18:32 – 20:00
  • लाभ(शुभ)20:00 – 21:29
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))21:29 – 22:58
  • शुभ(शुभ)22:58 – 00:27 (22 सित॰)
  • अमृत(शुभ)00:27 (22 सित॰) – 01:56 (22 सित॰)
  • चर(सामान्य)01:56 (22 सित॰) – 03:25 (22 सित॰)
  • रोग(वर्जित (परंपरा))03:25 (22 सित॰) – 04:54 (22 सित॰)
  • काल(वर्जित (परंपरा))04:54 (22 सित॰) – 06:23 (22 सित॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61

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