पंचांग 22 सितंबर 2027
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
22 सितंबर 2027 · बुधवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय06:23
सूर्यास्त18:31
चंद्रोदय23:08
चंद्रास्त11:58
- मास:
- भाद्रपद (अमांत) · आश्विन (पूर्णिमांत)
- संवत:
- शक 1949 · विक्रम (चैत्रादि) 2084
- संवत्सर:
- प्लवंग (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- वर्षा · दक्षिणायन
- सूर्य राशि:
- कन्या
- चंद्र राशि:
- वृषभ 05:32 (23 सित॰) तक, फिर मिथुन
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- बुधवार
- तिथि
- कृष्ण सप्तमी 04:37 (23 सित॰) तक, फिर कृष्ण अष्टमी 02:57 (24 सित॰) तक
- नक्षत्र
- रोहिणी 17:52 तक, फिर मृगशीर्ष 17:07 (23 सित॰) तक
- योग
- सिद्धि 01:59 (23 सित॰) तक, फिर व्यतीपात 23:35 (23 सित॰) तक
- करण
- विष्टि 17:17 तक, फिर बव 04:37 (23 सित॰) तक, फिर बालव 15:50 (23 सित॰) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त12:03 – 12:51परंपरा में बुधवार को अभिजित नहीं लिया जाता
- राहु काल12:27 – 13:58
- यमगंड07:54 – 09:25
- गुलिक काल10:56 – 12:27
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- लाभ(शुभ)06:23 – 07:54
- अमृत(शुभ)07:54 – 09:25
- काल(वर्जित (परंपरा))09:25 – 10:56
- शुभ(शुभ)10:56 – 12:27
- रोग(वर्जित (परंपरा))12:27 – 13:58
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))13:58 – 15:29
- चर(सामान्य)15:29 – 17:00
- लाभ(शुभ)17:00 – 18:31
रात
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))18:31 – 20:00
- शुभ(शुभ)20:00 – 21:29
- अमृत(शुभ)21:29 – 22:58
- चर(सामान्य)22:58 – 00:27 (23 सित॰)
- रोग(वर्जित (परंपरा))00:27 (23 सित॰) – 01:56 (23 सित॰)
- काल(वर्जित (परंपरा))01:56 (23 सित॰) – 03:25 (23 सित॰)
- लाभ(शुभ)03:25 (23 सित॰) – 04:54 (23 सित॰)
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))04:54 (23 सित॰) – 06:23 (23 सित॰)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61
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