पंचांग 9 जून 2039

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

9 जून 2039 · गुरुवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय05:57
सूर्यास्त19:10
चंद्रोदय22:05
चंद्रास्त08:22
मास:
ज्येष्ठ (अमांत) · आषाढ़ (पूर्णिमांत)
संवत:
शक 1961 · विक्रम (चैत्रादि) 2096
संवत्सर:
सिद्धार्थी (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
ग्रीष्म · उत्तरायण
सूर्य राशि:
वृषभ
चंद्र राशि:
धनु 13:58 तक, फिर मकर

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
गुरुवार
तिथि
कृष्ण तृतीया 13:57 तक, फिर कृष्ण चतुर्थी 11:21 (10 जून) तक
नक्षत्र
पूर्वाषाढ़ा 08:30 तक, फिर उत्तराषाढ़ा 06:34 (10 जून) तक
योग
शुक्ल 07:49 तक, फिर ब्रह्म 04:30 (10 जून) तक, फिर इन्द्र 01:40 (11 जून) तक
करण
विष्टि 13:57 तक, फिर बव 00:35 (10 जून) तक, फिर बालव 11:21 (10 जून) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:07 – 13:00
  • राहु काल14:12 – 15:52
  • यमगंड05:57 – 07:36
  • गुलिक काल09:15 – 10:54

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • शुभ(शुभ)05:57 – 07:36
  • रोग(वर्जित (परंपरा))07:36 – 09:15
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))09:15 – 10:54
  • चर(सामान्य)10:54 – 12:33
  • लाभ(शुभ)12:33 – 14:12
  • अमृत(शुभ)14:12 – 15:52
  • काल(वर्जित (परंपरा))15:52 – 17:31
  • शुभ(शुभ)17:31 – 19:10

रात

  • अमृत(शुभ)19:10 – 20:31
  • चर(सामान्य)20:31 – 21:52
  • रोग(वर्जित (परंपरा))21:52 – 23:12
  • काल(वर्जित (परंपरा))23:12 – 00:33 (10 जून)
  • लाभ(शुभ)00:33 (10 जून) – 01:54 (10 जून)
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))01:54 (10 जून) – 03:15 (10 जून)
  • शुभ(शुभ)03:15 (10 जून) – 04:36 (10 जून)
  • अमृत(शुभ)04:36 (10 जून) – 05:57 (10 जून)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 123

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