पंचांग 30 दिसंबर 2064
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
30 दिसंबर 2064 · मंगलवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय07:06
सूर्यास्त18:08
चंद्रोदय00:23 (31 दिस॰)
चंद्रास्त11:43
- मास:
- मार्गशीर्ष (अमांत) · पौष (पूर्णिमांत)
- संवत:
- शक 1986 · विक्रम (चैत्रादि) 2121
- संवत्सर:
- तारण (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- हेमंत · दक्षिणायन
- सूर्य राशि:
- धनु
- चंद्र राशि:
- कन्या
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- मंगलवार
- तिथि
- कृष्ण सप्तमी 18:18 तक, फिर कृष्ण अष्टमी 16:17 (31 दिस॰) तक
- नक्षत्र
- उत्तराफाल्गुनी 20:15 तक, फिर हस्त 18:54 (31 दिस॰) तक
- योग
- सौभाग्य 17:42 तक, फिर शोभन 14:52 (31 दिस॰) तक
- करण
- विष्टि 07:12 तक, फिर बव 18:18 तक, फिर बालव 05:19 (31 दिस॰) तक, फिर कौलव 16:17 (31 दिस॰) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त12:15 – 12:59
- राहु काल15:22 – 16:45
- यमगंड09:51 – 11:14
- गुलिक काल12:37 – 14:00
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- रोग(वर्जित (परंपरा))07:06 – 08:28
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))08:28 – 09:51
- चर(सामान्य)09:51 – 11:14
- लाभ(शुभ)11:14 – 12:37
- अमृत(शुभ)12:37 – 14:00
- काल(वर्जित (परंपरा))14:00 – 15:22
- शुभ(शुभ)15:22 – 16:45
- रोग(वर्जित (परंपरा))16:45 – 18:08
रात
- काल(वर्जित (परंपरा))18:08 – 19:45
- लाभ(शुभ)19:45 – 21:22
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))21:22 – 23:00
- शुभ(शुभ)23:00 – 00:37 (31 दिस॰)
- अमृत(शुभ)00:37 (31 दिस॰) – 02:14 (31 दिस॰)
- चर(सामान्य)02:14 (31 दिस॰) – 03:51 (31 दिस॰)
- रोग(वर्जित (परंपरा))03:51 (31 दिस॰) – 05:29 (31 दिस॰)
- काल(वर्जित (परंपरा))05:29 (31 दिस॰) – 07:06 (31 दिस॰)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:अध्याय 3 · जन्म-विवरण से कुंडली कैसे बनती है · पृष्ठ 22
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