पंचांग 14 फ़रवरी 2026

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

14 फ़रवरी 2026 · शनिवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय07:02
सूर्यास्त18:34
चंद्रोदय05:27 (15 फ़र॰)
चंद्रास्त15:46
मास:
माघ (अमांत) · फाल्गुन (पूर्णिमांत)
संवत:
शक 1947 · विक्रम (चैत्रादि) 2082
संवत्सर:
विश्वावसु (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
शिशिर · उत्तरायण
सूर्य राशि:
कुंभ
चंद्र राशि:
धनु 00:42 (15 फ़र॰) तक, फिर मकर

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
शनिवार
तिथि
कृष्ण द्वादशी 16:02 तक, फिर कृष्ण त्रयोदशी 17:05 (15 फ़र॰) तक
नक्षत्र
पूर्वाषाढ़ा 18:16 तक, फिर उत्तराषाढ़ा 19:48 (15 फ़र॰) तक
योग
सिद्धि 03:17 (15 फ़र॰) तक, फिर व्यतीपात 02:46 (16 फ़र॰) तक
करण
तैतिल 16:02 तक, फिर गर 04:38 (15 फ़र॰) तक, फिर वणिज 17:05 (15 फ़र॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:25 – 13:11
  • राहु काल09:55 – 11:22
  • यमगंड14:15 – 15:41
  • गुलिक काल07:02 – 08:29

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • काल(वर्जित (परंपरा))07:02 – 08:29
  • शुभ(शुभ)08:29 – 09:55
  • रोग(वर्जित (परंपरा))09:55 – 11:22
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))11:22 – 12:48
  • चर(सामान्य)12:48 – 14:15
  • लाभ(शुभ)14:15 – 15:41
  • अमृत(शुभ)15:41 – 17:08
  • काल(वर्जित (परंपरा))17:08 – 18:34

रात

  • लाभ(शुभ)18:34 – 20:08
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))20:08 – 21:41
  • शुभ(शुभ)21:41 – 23:15
  • अमृत(शुभ)23:15 – 00:48 (15 फ़र॰)
  • चर(सामान्य)00:48 (15 फ़र॰) – 02:22 (15 फ़र॰)
  • रोग(वर्जित (परंपरा))02:22 (15 फ़र॰) – 03:55 (15 फ़र॰)
  • काल(वर्जित (परंपरा))03:55 (15 फ़र॰) – 05:28 (15 फ़र॰)
  • लाभ(शुभ)05:28 (15 फ़र॰) – 07:02 (15 फ़र॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61

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