पंचांग 15 फ़रवरी 2026
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
15 फ़रवरी 2026 · रविवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय07:02
सूर्यास्त18:35
चंद्रोदय06:11 (16 फ़र॰)
चंद्रास्त16:42
- मास:
- माघ (अमांत) · फाल्गुन (पूर्णिमांत)
- संवत:
- शक 1947 · विक्रम (चैत्रादि) 2082
- संवत्सर:
- विश्वावसु (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- शिशिर · उत्तरायण
- सूर्य राशि:
- कुंभ
- चंद्र राशि:
- मकर
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- रविवार
- तिथि
- कृष्ण त्रयोदशी 17:05 तक, फिर कृष्ण चतुर्दशी 17:34 (16 फ़र॰) तक
- नक्षत्र
- उत्तराषाढ़ा 19:48 तक, फिर श्रवण 20:48 (16 फ़र॰) तक
- योग
- व्यतीपात 02:46 (16 फ़र॰) तक, फिर वरीयान 01:50 (17 फ़र॰) तक
- करण
- वणिज 17:05 तक, फिर विष्टि 05:24 (16 फ़र॰) तक, फिर शकुनि 17:34 (16 फ़र॰) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त12:25 – 13:11
- राहु काल17:08 – 18:35
- यमगंड12:48 – 14:15
- गुलिक काल15:41 – 17:08
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))07:02 – 08:28
- चर(सामान्य)08:28 – 09:55
- लाभ(शुभ)09:55 – 11:22
- अमृत(शुभ)11:22 – 12:48
- काल(वर्जित (परंपरा))12:48 – 14:15
- शुभ(शुभ)14:15 – 15:41
- रोग(वर्जित (परंपरा))15:41 – 17:08
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))17:08 – 18:35
रात
- शुभ(शुभ)18:35 – 20:08
- अमृत(शुभ)20:08 – 21:41
- चर(सामान्य)21:41 – 23:15
- रोग(वर्जित (परंपरा))23:15 – 00:48 (16 फ़र॰)
- काल(वर्जित (परंपरा))00:48 (16 फ़र॰) – 02:21 (16 फ़र॰)
- लाभ(शुभ)02:21 (16 फ़र॰) – 03:55 (16 फ़र॰)
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))03:55 (16 फ़र॰) – 05:28 (16 फ़र॰)
- शुभ(शुभ)05:28 (16 फ़र॰) – 07:01 (16 फ़र॰)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61
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